Thursday, April 7, 2016

"प्रार्थना के पूर्व"


ईश्वर सबसे बुद्धिमान और सबसे होशियार है। 
उसको सबकी ख़बर है, उसकी सब पर नज़र है। 

जो हम बोल रहे हैं, वो उससे ज़्यादा सुन पा रहा है 
जो हम देख रहे हैं, वो उससे ज़्यादा देख पा रहा है। 
हम जिस लायक हैं, उसने उतना दे रख है। 

ईश्वरीय कृपा पर विश्वास हो जाने पर 
प्रलोभन और आशा से मुक्ति मिल जाती है 

क्यूँकि ईश्वर से कुछ आशा करना 
उसे छोटा करना है। 

"ऋचा श्रीवास्तव"
पटना, बिहार 

Sunday, November 15, 2015

बेटी

"बेटी" 



बेटी को याद आता है अपना बचपन
जब दूर देश से आते हैं पिताजी

बेटी की आँखों में भर जाते हैं आँसू
जब माँ प्यार भरा हाथ रखती है सर पर

बेटी भूल जाती है ससुराल का सारा पाठ
जब भाई रखता है घर में पहला कदम

बेटी को याद आती है मुट्ठी में बन्द तितिलियाँ
जब बहन के आने का मिलता है सन्देश

इस तरह बेटी, बहू बन कर भी
नहीं भुला पाती बाबुल का गलियारा

क्योंकि, उसकी आँखों के सामने
खुल जाती है एक साथ कई बन्द किताबें।

ऋचा श्रीवास्तव
15-11-2015 

पटना